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  5. फ्रेकल्स यानी झाईयों के बारे में ज़रूरी जानकारी – Freckles In Hindi

बीच पर छुट्टियों के बाद अगर आपकी स्किन पर लाल या भूरे गोलाकार स्पॉटस हो गए हैं, तो हो सकता है कि ये फ्रेकल्स हैं। अगर आप सोच रहे हैं कि ये खतरनाक होते हैं तो आप गलत हैं। अमूमन फ्रेकल्स गोरी स्किन पर लगातार सूरज की रोशनी में आने के बाद हो जाते हैं। फ्रेकल्स को हिन्दी में झाइयां बोलते हैं, और कुछ लोग इसे एफेलाइड्स भी कहते हैं।

इसके बारे में कुछ महिलाओं का मानना है कि ये उनकी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं तो वहीं कुछ उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। इस आर्टिकल में हम आपको फ्रेकल्स यानी झाइयों और अन्य डार्क स्पॉटस के बीच के अंतर को समझाएंगे। साथ ही, यह भी बताएंगे कि झाइयों को किस तरह के इलाज से ठीक किया जा सकता है।

फ्रेकल्स क्या हैं ? – What Are Freckles In Hindi

सूरज की रोशनी में देर तक रहने के बाद आपकी स्किन पर छोटे भूरे या लाल रंग के स्पॉटस हो जाते हैं, उन्हें आम भाषा में फ्रेकल्स या झाइयां कहा जाता है। ये 1- 2 मिमी की साइज में होते हैं और अमूमन चेहरे, गर्दन, बाजू, पीठ और छाती पर हो जाते हैं। गोरी स्किन, लाल बाल और हरी आंखों वाले लोगों को फ्रेकल्स होने की आशंका [1] ज्यादा रहती है।

फ्रेकल्स के प्रकार - Types Of Freckles In Hindi

फ्रेकल्स दो प्रकार के होते हैं –

1. हाइपरपिगमेंटेशन

इस स्थिति में त्वचा का रंग नॉर्मल से थोड़ा डार्क हो जाता है। कई बार स्किन पर काले रंग के दाग भी पड़ जाते हैं। यह अमूमन सिर और गालों पर होता है।

2. हाइपोपिगमेंटेशन

इस स्थिति में त्वचा का रंग नॉर्मल से हल्का हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि स्किन में मेलानिन पिगमेंट का निर्माण कम [2] हो जाता है।

फ्रेकल्स के कारण – Causes Of Freckles In Hindi

Women worry about strong sunlight problem with UV rays

1. सूरज की रोशनी से संपर्क

फ्रेकल्स सूरज के संपर्क में ज्यादा देर तक रहने से हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मेलानिन यानी ब्राउन स्किन पिगमेंट और मेलनोसाइट्स यानी मेलानिन सेल्स में वृद्धि हो जाती है।

2. वंशानुगत

कुछ लोगों में फ्रेकल्स हेरेडिट्री यानी वंशानुगत भी होते हैं। हमारा शरीर दो तरह के मेलानिन का निर्माण करता है- यूमेलानिन और फ़्यूमेलानिन। हमारी बॉडी किस तरह का मेलानिन बनाती है, यह एक मुख्य फ्रेकल जीन पर निर्भर करता है, जिसका नाम एमसी1आर [3] है। यूमेलानिन स्किन को खतरनाक यूवी किरणों से बचाता है और यह डार्क स्किन, बालों और आंखों वाले लोगों में होता है। फ़्यूमेलानिन लाइट स्किन, बालों और आंखों वाले लोगों में होता है।

फ्रीकल्स, लेंटिगिन्स और मोल्स के बीच अंतर - Difference Between Freckles, Lentigines & Moles

फ्रेकल्स को अमूमन अन्य पिगमेंट स्पॉटस समझ लिया जाता है। ये सोलर लेन्टिगिन्स (उम्र के असर या सूरज की रोशनी के संपर्क में आने से होने वाले धब्बे) [4] और मेलनोसाइटिक नीवस [5] (तिल या बर्थ मार्क) से अलग दिखते हैं।

1. फ्रेकल्स

फ्रेकल्स साइज में छोटे, फ्लैट और कई होते हैं। इनका आकार 1- 2 मिमी ही होता है। इनके होने की वजह सन एक्सपोजर और जींस हैं। यह बच्चों के साथ बड़ों को भी हो सकता है। लाइट स्किन टोन वाले लोगों को फ्रेकल्स होने की आशंका ज्यादा रहती है। ये सर्दी के मौसम में अमूमन कम दिखते हैं।

2. लेन्टिगिन्स

लेन्टिगिन्स साइज में बड़े और ब्राउन कलर के धब्बे होते हैं। इनका साइज 6 मिमी से कम रहता है। ये अमूमन सन एक्सपोजर की वजह से होते हैं और बुजुर्गों की स्किन पर होते हैं। किसी भी स्किन कलर वालों को यह हो सकता है और हर मौसम में एक समान बना रहता है।

3. मोल्स

मोल्स फ्लैट साइज के ब्राउन स्पॉटस होते हैं। इनका साइज 2 मिमी या इससे ज्यादा रहता है। ये एक साथ क्लस्टर में स्किन सेल्स के बढ़ने की वजह से हो जाते हैं। ये जन्म से होते हैं या किशोरावस्था में दिखने शुरू हो जाते हैं। कसी भी रंगत वालों को मोल्स हो सकते हैं। ये किसी भी मौसम में हो सकते हैं और गायब भी हो सकते हैं।

फ्रेकल्स का इलाज - Treatment For Freckles In Hindi

Step by step concept of healing and removing freckles

फ्रेकल्स अमूमन खतरनाक नहीं होते हैं और इन्हें मेडिकली इलाज की जरूरत नहीं पड़ती। हां, यह जरूर है कि कुछ ऐसे ट्रीटमेंट उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से इनके दिखने को हल्का किया जा सकता है। हालांकि, झाइयां सूरज की रोशनी के संपर्क में आने से फिर से हो सकती हैं। ऐसा कहा और माना जाता है कि नियमित तौर पर सनस्क्रीन लगाने से फ्रेकल्स से बचा जा सकता है। अगर आप अपने फ्रेकल्स को ठीक करना चाहते हैं, तो आपको एक सर्टिफाइड डर्मेटोलॉजिस्ट से मिलकर निम्न बताए गए ट्रीटमेंट के बारे में सोचना चाहिए।

1. ब्लीचिंग - Bleaching

टॉपिकल ब्लीचिंग क्रीम या फेडिंग क्रीम का इस्तेमाल जब लंबे समय तक किया जाता है तो इनमें फ्रेकल्स को हल्का करने की क्षमता होती है। इन क्रीम में कोजिक एसिड या हाइड्रोकिनोन होता है। लेकिन ऐसी किसी भी क्रीम को अपने चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर कर लेना चाहिए क्योंकि ये बर्निंग या ड्राइनेस का कारण हो सकते हैं।

2. रेटिनॉइड्स - Retinoids

रेटिनॉइड्स विटामिन ए डेरिवेटिव होते हैं, जिनमें स्किन के कलर को हल्का करने की शक्ति होती है। ये खतरनाक अल्ट्रा वायलेट- बी रेडिएशन को एब्जॉर्ब करके काम करते हैं। रेटिनॉइड्स के साइड इफेक्ट्स में रेडनेस, इरिटेशन और सेन्सिटिविटी शामिल हैं।

3. क्रायोसर्जरी - Cryosurgery

यह एक इन- ऑफिस ट्रीटमेंट है, जिसमें फ्रेकल्स को लिक्विड नाइट्रोजन के साथ फ्रीज कर दिया जाता है। क्रायोसर्जरी सुरक्षित है और बहुत कम मामलों में कठिन होता है। हालांकि, इससे ब्लीडिंग या हाइपो- पिगमेंटेशन हो सकता है।

4. लेजर ट्रीटमेंट - Laser Treatment

लेजर ट्रीटमेंट [6] में लाइट का प्रयोग करके फ्रेकल वाली स्किन को ठीक किया जाता है। यह झाइयों से छुटकारा पाने का प्रभावशाली तरीका है लेकिन इससे स्किन पर लालिमा या खुजली हो सकती है। इसलिए ऐसे किसी भी सेशन की शुरुआत से पहले अपने डर्मेटोलॉजिस्ट से जरूर बात करें।

5. केमिकल पील्स - Chemical Peels

केमिकल पील्स स्किन को एक्सफोलिएट करने के लिए ग्लाइकॉलिक एसिड या लैक्टिक एसिड जैसे केमिकल्स पर निर्भर करते हैं। डार्क स्किन के टॉप लेयर को हटाया जाता है ताकि नई और फ्रेश स्किन आ सके। इस प्रक्रिया में अस्थायी चुभन और लालिमा हो सकती है, जो बाद में दूर हो जाती है।

फ्रेकल्स के लिए घरेलू उपाय – Home Remedies for Freckles In Hindi

अन्य ट्रीटमेंट की तरह घरेलू उपाय बहुत लाभकारी नहीं हो सकते हैं लेकिन पिगमेंटेशन को कम करने के लिए दादी- नानी के समय से इनका प्रयोग किया जाता रहा है। वैज्ञानिक तौर पर इनके असर को साबित नहीं किया गया है लेकिन ये ऐसे घरेलू उपाय हैं, जो आपके चेहरे पर के पिगमेंट को कम जरूर कर सकते हैं।

1. नींबू – Lemon

नींबू के रस में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है, जो एक बेहतरीन स्किन लाइटनिंग एजेंट की तरह काम करता है। स्किन पर इसके नियमित प्रयोग से चेहरे पर की झाइयों का रंग कम हो जाता है और धीरे- धीरे ये गायब हो जाती हैं।

नींबू के रस को ऐसे लगाएं

एक चम्मच नींबू का रस लें और इसमें एक चम्मच शहद और बादाम का तेल मिला लें। इसे अपने चेहरे पर लगा लें और लगभग 10 मिनट तक मालिश करते रहें। आप इस मिश्रण को रोजाना अपने चेहरे पर लगाएं।

2. शहद – Honey

शहद में ऐसे फ्लेवोनॉइड्स होते हैं, जो टायरोसिनेसिस [7] एक्टिविटी को रोकते हैं और झाइयों के दिखने को कम करते हैं।

शहद को ऐसे लगाएं

शहद को जब आप नींबू के जूस के साथ मिला कर लगाएंगे तो यह जादू की तरह काम करता है। आप एक चम्मच शहद में एक चम्मच नींबू का जूस मिला लें और प्रभावित जगह पर लगाएं। आप चाहें तो इसे पूरी स्किन पर भी लगा सकते हैं, यह फायदा ही करेगा। जब यह मिश्रण चेहरे पर सूख जाए तो ठंडे पानी से धो लें।

3. एलो वेरा - Aloe Vera

एलो वेरा में भी टायरोसिनेसिस एक्टिविटी को कम करने की क्षमता होती है, जिससे मेलानिन का निर्माण कम हो जाता है।

एलो वेरा को ऐसे लगाएं

इसके लिए आपको सिर्फ एलो वेरा की एक टहनी लेकर उससे फ्रेश जेल निकलना है । अब इस जेल को अपने चेहरे पर लगाएं और कुछ देर मालिश करें। जब यह सूख जाए तो सादे पानी से साफ कर लें।

फ्रेकल्स से बचाव – Prevention Tips From Freckles In Hindi

फ्रेकल्स यानी झाइयों से बचने के लिए आप रोजाना निम्न कदम अपना सकते हैं –

  • एसपीएफ 30 या इससे ज्यादा वाली सनस्क्रीन को लगाने के बाद ही घर से बाहर निकलें। सनस्क्रीन को लगाने के कम से कम 20 मिनट बाद ही सूरज की रोशनी में जाना चाहिए ।
  • अगर आप लगातार सूरज की रोशनी के संपर्क में हैं, तो हर 2 घंटे के बाद आपको सनस्क्रीन को अपनी स्किन पर हर उस जगह लगाते रहना चाहिए, जो खुली है।
  • सुबह 10 बजे से शाम के 4 बजे तक तेज धूप में जाने से परहेज कीजिए। ऐसा इसलिए क्योंकि इस समय सूरज की किरणें अपने चरम पर होती हैं और स्किन के लिए ठीक नहीं होती हैं।
  • तेज धूप से अपनी स्किन को बचाने वाले कपड़े, सनग्लासेज और हैट जरूर पहनें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल - FAQs

1. क्या झाइयां खराब हैं? - Are Freckles Bad?

फ्रेकल्स खतरनाक नहीं होते हैं और न ही ये किसी हेल्थ समस्या की पहचान हैं। ये सिर्फ पिगमेंट सेल्स हैं, जो स्किन पर छोटे समूहों में होते हैं। ये अमूमन टैन या लाइट ब्राउन कलर के और साइज में फ्लैट एवं छोटे होते हैं।

2. क्या झाइयां सुंदरता की निशानी हैं? Are Freckles A Sign Of Beauty?

आज के समय में फ्रेकल्स को किसी के व्यक्तित्व की पहचान माना जाता है। लेकिन यह ज़्यादातर आपकी सोच पर निर्भर करता है।

3. झाइयां किस उम्र में दूर हो जाती हैं? At What Age Do Freckles Go Away?

झाइयां उम्र बढ़ने के साथ थोड़ी हल्की जरूर हो जाती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप सनस्क्रीन लगाना या सनग्लासेज पहनना छोड़ दें।

निष्कर्ष - Conclusion

फ्रेकल्स स्किन के लिए बिल्कुल भी खतरनाक नहीं होते हैं। ये जेनेटिक्स और सूरज की किरणों के संपर्क में आने की वजह से हो जाते हैं। यदि किसी को फ्रेकल्स यानी झाइयां हो जाती हैं, तो उसे धूप में अपनी स्किन के अतिरिक्त देखभाल करने की जरूरत पड़ जाती है।

आप ऊपर बताए गए घरेलू उपायों को अपनाकर अपने चेहरे पर से झाइयों के रंग को हल्का कर सकते हैं। आपको अपनी स्किन टाइप के बारे में भी जानकारी रखनी चाहिए। अगर स्किन पर कोई नया बदलाव या दाग- धब्बे हैं, जो घरेलू उपायों को अपनाने के बाद भी नहीं जा रहे हैं, तो आपको डर्मेटोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।

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